तलाश..
वक़्त की तेज़ रफ़्तार.
के साथ आहिस्ता आहिस्ता,
बढ़ती हुई बहुत आगे तक..
पहुँच गई जिंदगी..
झटक देती हूँ कुछ सवालों को.
फ़िर भी जेहन में..
एक गूँज सुनाई देती है.
अंतिम क्षण तक ख़ोज.
जारी रहेगी क्या ?
क्यों नहीं मिला..
आज तक???
यथार्थ के धरातल पर कोई.
जो विचारों के झंझावात को.
मन के भीतर डूबते उतराते.
जज्बातों को.
अनछुए पहलुओं को.
ख़यालों की बुनियाद को.
घुमड़ते तूफ़ानो को.
साँसों की उच्छ्वासों को.
मेरे अनसुलझे रहस्यों को छूकर
मुझे समझने की ज़हमत..
उठा पाने में समर्थ होता.
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