अभिशाप..

 काँप उठी रूह.. 

बस अब बस..

लगता है... द्वापर से कलयुग तक..

दुर्योधन.. दुःशासन आज भी जिंदा हैं.

भीष्म पितामह का मौन..

धृतराष्ट्र का अन्धापन..

पाँच पाँच पतियों का मौन..

ओह. द्वापर का वह अभिशाप..

कितनी द्रौपदियों के शील का हरण करेगा.

कितनों की मौत का कारण बनेगा.

 ओरत की आत्मा को छीलता. यह दंश.

कितनी पद्मिनियों के जौहर का कारण बनेगा.

क्या कभी कोई कृष्ण आकर..

 विषदंश की जलन को दूर करेगा.

क्या पापियों के नाश के लिए. भवानी आएंगी.

या फिर  इस युग का महाभारत का इतिहास रचा जाएगा..

                                                                                       मेरी कलम से..GD




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