रेगिस्तान..
कैसे बन जाते हैं रेगिस्तान.
क्या कहानी है इन मरुस्थलों की.
कभी यहाँ भी नदियों की कलकल नाद
गूँजती होगी
कभी तो कोई दरख़्त यहाँ भी.
फलाफूला होगा.
अब तो सब बीता हुआ कल हो गया है
शेष रह गई है मौन दास्तां
ये तो एहसास की बातें हैं.
अनकहे जज्बात की कतारें हैं.
यह तो प्रमाण है कि
उपेक्षा और तिरस्कार सहते सहते
सूख गया होगा अथाह प्रेम का दरिया.
किसी प्रेमी के इंतजार में अवनि निष्ठुर हो गई होगी.
तभी चट्टान की तरह सख्त और शुष्क बन गई होगी.
सच है प्रेमी का विछोह कैसे सहती.
इसलिए धरा मरुस्थल बन गई होगी.
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